जेबुन्निसा लिखती हैं- "चाहे कोई मक्का का पवित्रतम स्थान हो या तीर्थस्थल मंदिर, मैं दोनों जगह जाती हूँ। दोनों ही मेरे हैं। जहाँ कहीं भी भगवान की पूजा होती है, वह मेरा भगवान है।"
TFIPOST English
TFIPOST Global
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
tfipost.in
  • राजनीति
    • सभी
    • चर्चित
    • बिहार डायरी
    • मत
    • समीक्षा
    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    CJP का यू-टर्न क्यों? पहले अपील, अब INDIA गठबंधन की रैली से दूरी; AAP कनेक्शन पर सवाल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    ‘जेन-जी’ से ‘रिजीम चेंज’ तक: शब्दों के पीछे नैरेटिव का खेल

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    बैलेट पेपर से भी हारी कांग्रेस, BJP का तंज—अब कहां गई ‘वोट चोरी’ की कहानी?

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    महर्षि वाल्मीकि: जिन्होंने ‘राम’ को जन-जन तक पहुँचाया

    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • सभी
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    Bangladesh Crisis : क्या बांग्लादेश से छिन जाएगी कपड़ा उद्योग की ताकत?

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    What MCA Data Reveals About India’s Growing LLP and OPC Ecosystem

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    H-1B पर ट्रंप का नया वार: Microsoft से Infosys-TCS तक शिकंजा, भारतीयों के लिए अमेरिका में नौकरियां खत्म ?

    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • सभी
    • आयुध
    • रणनीति
    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    अग्निवीरों की 4 साल की सेवा अब 6 साल, सरकार का बड़ा फैसला; जानिए क्या-क्या बदलेगा

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    नए IAF चीफ का ‘VAYU’ मिशन क्या है? चार अक्षरों में भारतीय वायुसेना की नई युद्ध रणनीति

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    HSL-KSPL Deal: काकीनाडा में जहाज बनाएगा रक्षा मंत्रालय का PSU? 1941 से अब तक का सफर

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    एक जहाज़ लॉन्च करना समारोह, पाँचवाँ समय पर देना उद्योग! HSL CMD ने बताया भारत की शिपबिल्डिंग का असली मंत्र

    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • सभी
    • AMERIKA
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    अमेरिका में मौत का लाइव तमाशा! कौन हैं निदाल हसन, जिन्हें फायरिंग स्क्वाड से दी जाएगी सजा?

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    भारत का JD Vance को करारा जवाब! भारतीय पेशेवरों पर टिप्पणी को बताया ‘बेहद आपत्तिजनक’, H-1B पर भी साफ की तस्वीर

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    The Moon Is Ours’! ट्रंप के दावे के बीच बड़ा सवाल- क्या कोई देश चांद पर कब्जा कर सकता है

    BRICS 2026 में PM Modi, Putin and Xi Jinping

    BRICS Explained: क्या अमेरिकी डॉलर से दूर जा रही है दुनिया ?

    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • सभी
    • इतिहास
    • संस्कृति
    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    विजयादशमी: “संगठन में शक्ति” का प्रतीक

    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • सभी
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    ‘मिस्टर रोबोट’ का नया खतरा; फोन से ऐप गायब, बैंक से पैसा साफ

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    Liver Support vs Metabolic Support: Which Supplement Fits Which Goal?

    पीएम मोदी मिलें खिलाड़ियों से

    एशियन गेम्स 2026 के पदक विजेता खिलाड़ियों से मिले PM मोदी, 85 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहा भारत

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    भारत में हेयर रिस्टोरेशन: जल्दबाज़ी वाले समाधानों से ज़्यादा ज़रूरी है सही योजना

    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
tfipost.in
tfipost.in
कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • रक्षा
  • विश्व
  • ज्ञान
  • बैठक
  • प्रीमियम

जब औरंगज़ेब ने कृष्णभक्ति के कारण अपनी ही बेटी को दी उम्रकैद, जानिए कैसा था ‘फ़ारसी की मीरा’ का जीवन

जेबुन्निसा को बनना पड़ा अब्बा के कोप का भाजन

architsingh द्वारा architsingh
14 October 2024
in इतिहास, ज्ञान, संस्कृति
जेबुन्निसा, औरंगज़ेब की बेटी

औरंगज़ेब की बेटी जेबुन्निसा के काव्य में शृंगार के बाद विरह क्यों, पढ़िए

Share on FacebookShare on X

15 फरवरी, 1638 में मुगल शासक औरंगज़ेब और उनकी बेगम दिलरस बानो के आँगन में उनकी पहली संतान के रूप में एक बेटी ने जन्म लिया। मुगल बादशाह के घर में जन्मी इस बेटी का नाम जेबुन्निसा रखा गया। हालाँकि, जेबुन्निसा के बचपन के बारे में अत्यधिक जानकारी हमें नहीं मिलती है, किंतु इतिहासकारों का मानना है कि उनका बचपन बेहद शानदार गुजरा। महल के लाड़-प्यार में पलने वाली जेबुन्निसा की मँगनी बचपन में ही उनके चचेरे भाई सुलेमान शिकोह से कर दी गई। किंतु सुलेमान शिकोह की बेहद कम उम्र में हुई मौत के कारण इनकी शादी नहीं हो सकी थी।

जेबुन्निसा एक शिक्षित, प्रतिभासंपन्न तथा दरबारी शिष्टाचार को भली-भाँति समझने वाली स्त्री थीं। औरंगज़ेब ने एक उच्च शिक्षित दरबारी महिला हफीजा मरियम तथा एक प्रमुख फ़ारसी कवि मुल्ला सईद अशरफ मजान्दारानी को जेबुन्निसा को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी। पढ़ाई में रुचि रखने वाली जेबुन्निसा ने दर्शन, भूगोल, इतिहास, गणित आदि विषयों में तेज़ी से महारत हासिल कर ली। इतिहास में जानकारी मिलती है कि मात्र 7 वर्ष की आयु में ही हाफिजा बनने पर शहज़ादी को तीस हजार अशरफियाँ अपने वालिद की ओर से इनाम के रूप में प्रदान की गईं। कहा जाता है कि इस दिन औरंगज़ेब ने दावत का आयोजन किया और दो दिन का अवकाश लेकर उत्सव मनाया।

संबंधितपोस्ट

बलिदान दिवस विशेष: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक भाषणों की प्रासंगिकता

पंजाब सीएम भगवंत मान की बढ़ीं मुश्किलें: वायरल वीडियो मामले में अकाल तख्त ने सुनाया फैसला

‘भारत पर इस्लामी आक्रमण होगा, तो किस तरफ होंगे सेना के मुस्लिम’? अंबेडकर को था संदेह, लिखा – इस्लाम के लिए हमारा देश दारुल हर्ब

और लोड करें

औरंगज़ेब की बेटी जेबुन्निसा: कविता-शायरियों का था शौक

जेबुन्निसा को पुस्तकों से बेहद प्रेम था, इसलिए उन्होंने अपने महल के विशाल पुस्तकालय को पूरा खंगाल लिया था। अध्ययन में उनकी रुचि को देखते हुए उनके लिए बाहर से भी पुस्तकें मँगवाई जाती थीं। बेहद सादगी से रहने वाली जेबुन्निसा से पिता औरंगज़ेब को विशेष लगाव था। कहा जाता है कि औरंगज़ेब अपनी इस बेटी को चार लाख सोने की अशरफियाँ ऊपरी खर्चे के तौर पर दिया करता था। जेबुन्निसा ने इन पैसों से विभिन्न ग्रंथों का फ़ारसी में अनुवाद करवाया तथा कवियों, विद्वानों आदि की सहायता किया करती थीं।

चूँकि मुग़ल काल में स्त्रियाँ घर की चारदीवारी तक ही सीमित थीं, तथा शाही महिलाएँ मुग़ल हरम तक ही कैद थीं। बाल-विवाह, पर्दा प्रथा जैसी कुरीतियाँ थीं, और महिलाओं के लिए अलग मदरसों आदि का अभाव था; ऐसे में सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक आदि क्षेत्रों में पुरुषों के समान स्त्रियों का प्रत्यक्ष योगदान देना स्वीकार्य नहीं था। जेबुन्निसा को भी शाही सुख-सुविधाएँ मिलने के बावजूद इस प्रकार के अनेक बंधनों का सामना करना पड़ा। कुरान शरीफ का अध्ययन करने के बाद उस पर टीका लिखने का कार्य प्रारंभ किया, किंतु एक महिला होने के कारण शहज़ादी को बादशाह ने इस कार्य की इजाज़त नहीं दी। जेबुन्निसा के गुरु मजान्दारानी एक फ़ारसी कवि थे, इसलिए शहज़ादी का भी कविता, शेर-ओ-शायरी की ओर रुझान बढ़ा।

समय के साथ-साथ जेबुन्निसा भी एक बेहतरीन शायरा के तौर पर उभरने लगीं। मुशायरों और महफ़िलों में जेबुन्निसा को आमंत्रित किया जाने लगा। जेबुन्निसा के कट्टर अब्बा को इनका मुशायरा आदि करना स्वीकार्य नहीं था। किंतु साहित्य प्रेमी व्यक्ति का भी अपने स्वच्छंद मन को कहीं और लगाना अत्यंत मुश्किल होता है। लिहाजा, जेबुन्निसा ने छिपकर मुशायरा करना शुरू किया। इन्होंने फ़ारसी में कविताओं की रचना की और नाम छिपाने के लिए मख़फ़ी नाम से लिखा। इनका सम्पूर्ण लेखन मूल रूप से फ़ारसी में ही उपलब्ध है। ‘दीवान-ए-मख़फ़ी’ नाम से उपलब्ध ग्रंथ में इनकी 5000 रचनाएँ संकलित हैं। इनकी मूल पांडुलिपियाँ ब्रिटिश लाइब्रेरी और नेशनल लाइब्रेरी ऑफ़ पेरिस में सहेज कर रखी गई हैं।

जेबुन्निसा के जीवन के साथ ही बदल गया उनके काव्य का चरित्र

इनके आरंभिक काव्य में प्रेम, यौवन की उमंगें, मधुर मिलन की लालसाएँ तथा श्रृंगार की प्रचुरता दिखाई देती है। किंतु इनकी उत्तरार्द्ध रचनाओं में प्रेयसी की निष्ठुरता, नियति की क्रूरता, दर्द-विरह आदि दिखाई देता है।

अब यहाँ समझने वाली बात यह है कि एक ही कवयित्री की रचनाओं में भाव वैविध्य क्यों आया?

दरअसल, प्रारंभिक जीवन शाही लाड़-प्यार में जीने वाली जेबुन्निसा का अंतिम आधा जीवन बेहद कठिनाई के साथ गुजरा। औरंगज़ेब के बारे में इतिहास में पढ़ने के दौरान हम सभी जानते हैं कि यह अत्यंत क्रूर शासक था जिसने न सिर्फ अपने अब्बा को कैद में रखा, बल्कि अपने भाई का कत्ल करवाया। इतना ही नहीं, अपने बेटे को भी औरंगज़ेब ने खत्म करवा दिया था। निश्चित रूप से यह क्रूरता उसकी बेटी जेबुन्निसा को भी सहनी पड़ी और उसे अपना आधा जीवन उम्रकैद में काटना पड़ा।

अब हम जानते हैं कि आखिर अपनी बेटी पर इतना प्यार लुटाने वाले औरंगज़ेब ने उसे उम्रकैद की सजा क्यों दी? दरअसल, कई जगह उल्लेख मिलता है कि जेबुन्निसा को कई बार समझाने के बाद भी उसने मुशायरों में जाना नहीं छोड़ा और छिप-छिप कर मुशायरों में भाग लेती रही। मुशायरों में जाने के दौरान जेबुन्निसा अलग ढंग के वस्त्र पहने करती थीं। चूँकि बाहर से भी पुस्तकें आने की वजह से उन्हें उस समय के समकालीन लेटेस्ट फ़ैशन की भी समझ थी, इसलिए जेबुन्निसा महफ़िलों में जाने के लिए सफेद रंग की पोशाक पहनतीं और आभूषणों में सिर्फ मोतियों की माला ही धारण करती थीं। इसके अतिरिक्त, वह किसी भी रत्न से श्रृंगार नहीं करती थीं। कहा जाता है कि औरंगज़ेब को जेबुन्निसा के इस तरह महफ़िलों में जाने की सच्चाई पता लग गई थी। इसीलिए, उसने जेबुन्निसा पर अनेक प्रतिबंध लगाए। किंतु बात यहीं तक नहीं रुकी। ऐसे ही एक मुशायरे में जेबुन्निसा ने हिंदू बुंदेला महाराज छत्रसाल को देखा और उनसे प्रेम कर बैठीं।

औरंगज़ेब ने अपनी ही बेटी को दे दी उम्रकैद

मुगलों ने खुद अनेक हिंदू स्त्रियों को जबरन मुस्लिम बनाकर हरम में लाकर कैद किया, किंतु उन्हें यह बिल्कुल मंजूर नहीं था कि एक मुग़ल शहज़ादी किसी हिंदू व्यक्ति से प्रेम करे। मज़हबी तौर पर बेहद कट्टर औरंगज़ेब को भी यह बात बिल्कुल स्वीकार्य नहीं थी कि उसकी बेटी किसी हिंदू परिवार से जुड़ें। लिहाजा, औरंगज़ेब को जैसे ही जेबुन्निसा के इस प्रेम की जानकारी हुई, वह बेहद क्रोधित हुआ और अपनी बेटी को दिल्ली के सलीमगढ़ किले में कैद करवा दिया। कई जगह जानकारी मिलती है कि मुशायरों में एक मामूली शायर से प्रेम हो जाने के कारण औरंगज़ेब ने जेबुन्निसा को कैद किया। हालाँकि, हकीकत जो भी है, लेकिन यह सत्य है कि प्रेम करने की सजा के तौर पर जेबुन्निसा को उम्रकैद हुई।

वास्तव में यही कारण रहा कि जेबुन्निसा के काव्य का उत्तरार्ध दर्द, विरह आदि से भरा है। हालाँकि, कैद के दौरान भी इनकी हिम्मत नहीं टूटी और ये काव्य रचना करती रहीं। इसी दौरान जेबुन्निसा ने कृष्ण भक्ति में भी रचनाएँ लिखीं। कहा जाता है कि जब ये आगरा के महल में रहती थीं, तब वहाँ इन्हें मथुरा के कृष्ण मंदिर की चोटी दिखाई देती थी, जिसे देखकर ही ये कृष्ण की भक्ति किया करती थीं। औरंगज़ेब को यह बिल्कुल पसंद नहीं था कि ये अल्लाह के अतिरिक्त किसी और की इबादत करें। एक कारण यह भी रहा होगा कि इन्हें दिल्ली के इस किले में कैद किया गया। कहा जाता है कि कैद के दौरान इनका शेष पूरा जीवन कृष्ण भक्ति में व्यतीत हुआ; किले की हर दीवार पर जेबुन्निसा को कृष्ण का दीदार हुआ करता था।

खीझे औरंगज़ेब ने तोड़वा दिया ओरछा का मंदिर

दीवान-ए-मख़फ़ी फ़ारसी में लिखा गया है, किंतु एक जगह उसकी कुछ पंक्तियों के हिंदी अनुवाद प्राप्त होते हैं, जहाँ जेबुन्निसा लिखती हैं: “चाहे कोई मक्का का पवित्रतम स्थान हो या तीर्थस्थल मंदिर, मैं दोनों जगह जाती हूँ। दोनों ही मेरे हैं। जहाँ कहीं भी भगवान की पूजा होती है, वह मेरा भगवान है।”

वास्तव में, फ़ारसी में कृष्ण भक्ति के जो पद जेबुन्निसा ने लिखे हैं, उन्हें पढ़कर यदि इन्हें फ़ारसी काव्य की मीरा कहा जाए, तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कहा जाता है कि उस समय उनके कृष्ण प्रेम को देखते हुए लोग उन्हें मुगलों की मीरा कहने लगे थे। जब उनका कृष्ण प्रेम और अधिक परवान चढ़ा तथा औरंगज़ेब को इस बात की जानकारी हुई, तो वह अपनी इस बेहद प्रिय पुत्री से घृणा करने लग गया। जदुनाथ सरकार सहित कई अन्य इतिहासकार भी यह दावा करते हैं कि जेबुन्निसा के कृष्ण प्रेम से खिसियाए औरंगज़ेब ने वर्ष 1669 में ओरछा के राजा वीर बुंदेला द्वारा बनवाए गए विराट कृष्ण मंदिर को तहस-नहस कर दिया था।

हालाँकि, उम्रकैद जैसी सजा मिलने के बाद भी शहजादी का कृष्ण प्रेम कम न होकर बढ़ता गया और इसी तरह किले की दीवारों में कैद होकर 1702 में जेबुन्निसा ने शरीर त्याग दिया। हालाँकि, जेबुन्निसा का नाम इतिहास के पन्नों में उस तरह से दर्ज नहीं हुआ, जिस तरह से औरंगज़ेब जैसे क्रूर शासकों का उल्लेख होता है, किंतु अब समय बदल रहा है और इतिहास में गुमनाम हो गए ऐसे उदार चरित लोगों पर भी विद्वानों में चर्चा होने लगी है।

स्रोत: Zeb-un-Nissa, जे़ब-अल-निसा, Daughter Of Aurangzeb, औरंगजेब की बेटी, Krishna Devotee, कृष्णभक्त
Tags: AurangzebHistoryKrishnaMughalZeb-un-Nissaइतिहासऔरंगजेबकृष्णजे़ब-अल-निसामुग़ल
शेयरट्वीटभेजिए
पिछली पोस्ट

कांग्रेस नेता ने AAP के उम्मीदवार पर ही चढ़ा दिया ट्रैक्टर, फिर अस्पताल में घुसकर मारा

अगली पोस्ट

‘चेत जाओ हिंदुओं नहीं तो ये रौंद देंगे’ बहराइच में दुर्गा विसर्जन यात्रा पर हमले को लेकर क्या कह रहे हैं लोग

संबंधित पोस्ट

लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
चर्चित

लर्निंग लाइसेंस पर गाड़ी चलाने वाले को भी मिलेगा बीमा क्लेम? हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

3 November 2026

ड्राइविंग सीखने के दौरान अगर किसी व्यक्ति की गाड़ी से दुर्घटना हो जाए, तो क्या बीमा कंपनी मुआवजा देने से इनकार कर सकती है? क्या...

राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा
संस्कृति

राष्ट्र सेविका समिति: प्रभाव से परिवर्तन तक 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा

29 October 2026

राष्ट्र सेविका समिति की 90 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा नारी शक्ति, व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, सेवा, सामाजिक जागरण और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणादायी गाथा...

महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत
ज्ञान

महर्षि वाल्मीकि: सामाजिक समरसता के शाश्वत प्रेरणास्रोत

26 October 2026

भारतीय सनातन संस्कृति की समृद्ध ज्ञान परंपरा में अनेक ऐसे संत और ऋषि हुए हैं, जिन्होंने अपनी आध्यात्मिक और सांसारिक शिक्षाओं के माध्यम से समरस...

और लोड करें

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

I agree to the Terms of use and Privacy Policy.
This site is protected by reCAPTCHA and the Google Privacy Policy and Terms of Service apply.

इस समय चल रहा है

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

India Built Rudra and Prachand. Now It Wants to Make Their Gun at Home.

00:03:14

INS Samarthak: The Indigenous Warship Built to Do More Than One Job VO:

00:03:01

Why Is India Investing in Underwater Weapons?

00:02:10

How DRDO Is Making India's Military Communications More Secure

00:03:28

How Ice on Aircraft Wings Can Turn Deadly

00:03:19
फेसबुक एक्स (ट्विटर) इन्स्टाग्राम यूट्यूब
टीऍफ़आईपोस्टtfipost.in
हिंदी खबर - आज के मुख्य समाचार - Hindi Khabar News - Aaj ke Mukhya Samachar
  • About us
  • Careers
  • Brand Partnerships
  • उपयोग की शर्तें
  • निजता नीति
  • साइटमैप

©2026 TFI Media Private Limited

कोई परिणाम नहीं मिला
सभी परिणाम देखें
  • राजनीति
    • चर्चित
    • मत
    • समीक्षा
  • अर्थव्यवस्था
    • वाणिज्य
    • व्यवसाय
  • रक्षा
    • आयुध
    • रणनीति
  • विश्व
    • अफ्रीका
    • अमेरिकाज़
    • एशिया पैसिफिक
    • यूरोप
    • वेस्ट एशिया
    • साउथ एशिया
  • ज्ञान
    • इतिहास
    • संस्कृति
  • बैठक
    • खेल
    • चलचित्र
    • तकनीक
    • भोजन
    • व्यंग
    • स्वास्थ्य
  • प्रीमियम
TFIPOST English
TFIPOST Global

©2026 TFI Media Private Limited